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RSS Leader Shantakumari Statement | Jantar Mantar Protest Brainwashing Gen Z


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नागपुर4 मिनट पहले

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शांताकुमारी नागपुर में राष्ट्र सेविका समिति के वार्षिक विजयादशमी उत्सव और शस्त्रपूजन कार्यक्रम में सभा को संबोधित कर रही थीं।  - Dainik Bhaskar

शांताकुमारी नागपुर में राष्ट्र सेविका समिति के वार्षिक विजयादशमी उत्सव और शस्त्रपूजन कार्यक्रम में सभा को संबोधित कर रही थीं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की महिला शाखा राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वी. शांताकुमारी ने जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भारत में काफी अस्थिरता पैदा कर रहा है।

शांतक्का ने दावा किया कि ‘दिमागी नक्सलवाद’ जहरीले विचारों का सबसे खतरनाक और अदृश्य इकोसिस्टम है। यह जेन जी का ब्रेनवॉश कर रहा है और महिलाओं के मन में भी अशांति पैदा कर रहा है।

शांताकुमारी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को असंवैधानिक बताया और कहा कि प्रदर्शनकारी समाज में रचनात्मक बदलाव नहीं चाहते, बल्कि देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।

देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सली देश के सामने मौजूद हैं।

नागपुर में 16 अक्टूबर को राष्ट्र सेविका समिति के वार्षिक विजयादशमी उत्सव और शस्त्रपूजन कार्यक्रम हुआ, शांताकुमारी इसी सभा को संबोधित कर रही थीं।

राष्ट्र सेविका समिति RSS का महिला संगठन है। इसकी प्रमुख संचालिका वी. शांताकुमारी को शांताक्का के नाम से भी जाना जाता है।

विजयादशमी समारोह की तस्वीरें…

जंतर-मंतर प्रदर्शन अराजकता फैला रहे

राष्ट्र सेविका समिति संचालक ने कहा, “हमने जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन देखे हैं। हम इन्हें असंवैधानिक प्रदर्शन कह सकते हैं। देश अराजकता का सामना कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य भारत में अस्थिरता पैदा करना और देश की संस्कृति को नष्ट करना है। वे इसी इरादे से यह सब कर रहे हैं।”

शांताकुमारी ने कहा, “ऐसा नहीं है कि वे समाज में कोई रचनात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। इसके बजाय, वे अस्थिरता पैदा कर रहे हैं और अपने फायदे के लिए जेन जी का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री के भाषण में हुआ था इस्तेमाल

‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पहली बार किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था, “हम जंगलों से सशस्त्र नक्सलियों को खत्म करने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल हुए हैं। हालांकि, सशस्त्र नक्सली चले गए हैं, लेकिन दिमागी नक्सली आसपास मौजूद हैं।”



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