Seema Kaliraman Wins Bronze at Commonwealth Games 2026


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यह कहना है स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भिवानी के दिनोद गांव की बहू और डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमन का। शादी, मां बनने, गंभीर शारीरिक परेशानी और करियर खत्म होने जैसी परिस्थितियों के बीच सीमा ने हार नहीं मानी। पति के भरोसे ने उन्हें फिर मैदान तक पहुंचाया और मेडल जीता।

अब सीमा एशियन गेम्स व ओलिंपिक का सपना देख रही है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सीमा ने अपनी जिंदगी के संघर्ष, दर्द और डिस्कस थ्रो में वापसी की कहानी बताई।

3 अगस्त को सीमा दिनोद गांव पहुंचीं। यहां ग्रामीण और परिवारवालों ने उनका स्वागत किया।

3 अगस्त को सीमा दिनोद गांव पहुंचीं। यहां ग्रामीण और परिवारवालों ने उनका स्वागत किया।

अब पढ़िए सीमा कालीरमन से हुए सवाल-जवाब…

सवाल: यहां तक पहुंचने के संघर्ष को कैसे देखती हैं? सीमा: जब कोई खिलाड़ी मेडल जीतता है तो लोगों को सिर्फ उसका मेडल दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे की मेहनत, त्याग और संघर्ष बहुत कम लोग जानते हैं। यह सिर्फ खिलाड़ी और उसके परिवार को ही पता होता है कि यहां तक पहुंचने के लिए कितना कुछ छोड़ना पड़ता है।

सवाल: डिस्कस थ्रो से जुड़ने की शुरुआत कैसे हुई? सीमा: मेरे पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं और खुद अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। स्कूल में खाली पीरियड के दौरान हमें डिस्कस उठाने के लिए बुलाया जाता था। वहीं मैंने पहली बार थ्रो किया। स्कूल की डीपी सुनीता मैडम ने मेरी प्रतिभा पहचानी। उन्होंने मुझे जोनल, जिला और राज्य स्तर पर खिलाया। बाद में मेरा चयन स्पैट में हुआ, जहां वेदप्रकाश सर ने मेरी तकनीक पर काम कराया। फिर अंडर-14 नेशनल में रिकॉर्ड बनाया।

सवाल: शादी और मां बनने के बाद खेल प्रभावित हुआ? सीमा: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में दर्द और सूजन रहने लगी थी। हमें लगा कि यह सामान्य है, लेकिन डिलीवरी के बाद परेशानी बढ़ गई। शरीर इतना कमजोर हो गया कि मैं ठीक से चल भी नहीं पाती थी और बेटे रुद्र को गोद में भी नहीं उठा सकती थी। मेरे पति मुझे कई डॉक्टरों के पास लेकर गए। इलाज शुरू हुआ। उसी दौरान उन्होंने कहा कि हम दोबारा मैदान में लौटेंगे और जितना होगा, उतना करेंगे।

स्कॉटलैंड से लौटने पर परिवार के लोग सीमा कालीरमन को लेने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने अपने बेटे रुद्र को गोद में उठा लिया।

स्कॉटलैंड से लौटने पर परिवार के लोग सीमा कालीरमन को लेने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने अपने बेटे रुद्र को गोद में उठा लिया।

सवाल: जब पति ने वापसी की बात कही तो आपका क्या जवाब था? सीमा: उस समय मेरी शारीरिक हालत बिल्कुल ठीक नहीं थी। मैं सामान्य रूप से चल भी नहीं पाती थी, इसलिए खेल में वापसी की कल्पना भी नहीं कर सकती थी। लेकिन उन्होंने लगातार मेरा हौसला बढ़ाया।

सवाल: आखिर वह आपको मैदान तक कैसे लेकर गए? सीमा: उन्होंने कहा कि सिर्फ मैदान चलो, कुछ नहीं करेंगे। फिर बोले कि एक बार डिस्कस फेंककर देखो। मैंने कोशिश की, लेकिन 15 मीटर भी थ्रो नहीं कर पाई। मैं वहीं रोने लगी और कहा कि अब मुझसे नहीं होगा। तब उन्होंने समझाया कि खिलाड़ी की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे फिर तैयार किया और आज मैं इस मुकाम पर हूं।

सवाल: उस समय कभी लगा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर पाएंगी? सीमा: शुरुआत में ऐसा नहीं लगा था, लेकिन खुद पर भरोसा था। मेरा और मेरे पति का अनुशासन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत रहा। प्रैक्टिस का समय कभी नहीं बदला। चाहे सुबह हो या शाम, प्रैक्टिस हर हाल में की। सबसे ज्यादा चुनौती शारीरिक थी। मानसिक रूप से मैंने कभी हार नहीं मानी। मेरा मानना है कि इंसान जो ठान ले, वह हासिल कर सकता है।

सवाल: शादी के बाद ससुराल का कितना सहयोग मिला? सीमा: मेरे ससुराल वालों ने कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया। परिवार और पूरे गांव ने हमेशा मेरा साथ दिया।

सवाल: पति और कोच के साथ इस सफर का कोई ऐसा पल, जो आज भी याद हो? सीमा: वापसी के दौरान जिम्नास्टिक की एक्सरसाइज करते समय मेरे हाथ छिल गए थे। उस समय पति ने मेरी फोटो खींच ली और कहा कि एक दिन जब तुम स्टेज पर मेडल लेकर खड़ी होगी, तब यह फोटो दिखाऊंगा। आज भी वह फोटो मेरे पास है। अब उसे देखकर हंसी आती है कि तब मैं कैसी थी और आज कहां पहुंच गई हूं।

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले डिसक्स थ्रो की प्रैक्टिस करतीं सीमा कालीरमन।-फाइल

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले डिसक्स थ्रो की प्रैक्टिस करतीं सीमा कालीरमन।-फाइल

सवाल: इस मेडल के पीछे सबसे बड़ा त्याग किसका मानती हैं? सीमा: मेरे पति का। उन्होंने हर संभव और कई बार असंभव लगने वाली चीज भी मेरे लिए की। हमारी कोई सरकारी नौकरी नहीं है, लेकिन उन्होंने कभी मुझे संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

सवाल: लोग कहते हैं कि मां बनने के बाद खिलाड़ी का करियर ढलान पर चला जाता है। आप क्या कहना चाहेंगी? सीमा: मेरे लिए तो बेटा रुद्र बहुत लकी रहा। उसके जन्म से पहले मेरा पर्सनल बेस्ट 48.08 मीटर था। उसके बाद मैंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। आज कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। आगे एशियन गेम्स और ओलिंपिक भी खेलना चाहती हूं। इसकी पूरी योजना मेरे कोच बनाएंगे।

सवाल: दूसरी बेटियों और बहुओं को क्या कहना चाहेंगी? सीमा: अगर आपके अंदर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता है तो पहला कदम जरूर उठाइए। जब आप खुद आगे बढ़ेंगे तो रास्ते में साथ देने वाले लोग भी मिल जाएंगे।

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