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Italy Parliament Voting | Giorgia Meloni Threatens Resignation


रोम7 मिनट पहले

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इटली में चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में एक्स्ट्रा सीटें देने के प्रस्ताव पर विवाद छिड़ गया है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार यह कानून लाना चाहती है। इसके तहत चुनाव में जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।

हालांकि, इसके लिए उसे दोनों सदनों में कम से कम 42% वोट हासिल करने होंगे। सरकार का कहना है कि इससे देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी और सरकारें बार-बार नहीं गिरेंगी। वहीं, विरोधियों का आरोप है कि इस कानून से चुनाव जीतने वाले गठबंधन को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाएगी।

इस कानून पर आज संसद में वोटिंग होनी है। मेलोनी ने साफ कहा है कि अगर कानून पास नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगी। ऐसे में इस वोटिंग को उनकी सरकार के लिए अहम माना जा रहा है।

कानून लागू हुआ तो किस तरह बटेंगी सीटें?

इटली की संसद में कुल 600 सीटें हैं। इनमें निचले सदन में 400 और सीनेट में 200 सीटें हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, चुनाव में जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 अतिरिक्त सीटें दी जाएंगी। इटली में सीटें बांटने का यह नया नियम लागू हुआ तो..

  • अगर सिर्फ निचले सदन का उदाहरण लें तो कुल 400 सीटों में से 70 सीटें बोनस के लिए अलग रखी जाएंगी।
  • बाकी 330 सीटें सभी पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में बांटी जाएंगी।
  • इसके बाद सबसे आगे रहने वाले गठबंधन को 70 बोनस सीटें मिलेंगी, बशर्ते उसे दोनों सदनों में कम से कम 42% वोट मिले हों।

उदाहरण के लिए, अगर पार्टी A के गठबंधन को 43%, पार्टी B को 35% और बाकी पार्टियों को 22% वोट मिलते हैं, तो पहले 330 सीटें वोटों के अनुपात में बांटी जाएंगी और शर्त पूरी होने पर पार्टी A के गठबंधन को 70 बोनस सीटें मिलेंगी।

इस तरह कुल सीटें 400 ही रहेंगी, 70 सीटें अलग से नहीं जुड़ेंगी।

इटली की निचली सदन।

इटली की निचली सदन।

इटली में 80 साल में 68 सरकारें बनीं

इटली में सरकारों के अस्थिर रहने का लंबा इतिहास है। 1946 में इटली के गणराज्य बनने के बाद से अब तक वहां 68 सरकारें बन चुकी हैं। 1954 में एक सरकार तो सिर्फ 22 दिन चली थी।

पिछले महीने जॉर्जिया मेलोनी ने एक रिकॉर्ड बनाया। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार इटली के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई।

मेलोनी की मौजूदा सरकार का पांच साल का कार्यकाल अगले साल खत्म होना है। हालांकि, अगर इस कानून को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में टूट होती है तो देश में समय से पहले चुनाव भी हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि अतिरिक्त सीटें मिलने से जीतने वाले गठबंधन के पास पर्याप्त ताकत होगी।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी टली ने सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने का रिकॉर्ड बनाया है।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी टली ने सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने का रिकॉर्ड बनाया है।

विरोधियों ने कहा- इससे लोकतंत्र को खतरा

विरोधियों का कहना है कि अतिरिक्त सीटें मिलने से चुनाव जीतने वाले गठबंधन के पास संसद में जरूरत से ज्यादा ताकत आ सकती है। इससे वह दूसरे सांसदों से बातचीत किए बिना कई बड़े फैसले कर सकेगा। इनमें जजों और राष्ट्रपति की नियुक्ति जैसे अहम मामले भी शामिल हैं। इससे लोकतंत्र को खतरा है।

वामपंथी विचारों वाले पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मासिमो जियानिनी ने इस कानून की तुलना 1923 में बने एक कानून से की। उस कानून ने उस समय नेशनल फासिस्ट पार्टी को संसद पर कब्जा करने में मदद की थी।

जियानिनी ने अपने पॉडकास्ट में कहा, “103 साल बाद वही तरीका फिर दोहराया जा रहा है। चुनावी कानून में भारी बहुमत के लिए बोनस सीटें देने से लोकतंत्र का संतुलन बदल जाता है।”

पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मासिमो जियानिनी। (फाइल फोटो)

पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मासिमो जियानिनी। (फाइल फोटो)

कानून के नाम पर भी बहस

कानून के समर्थकों ने इसे ‘स्टैबिलिकम’ यानी ‘स्थिरता’ नाम दिया है। उनका कहना है कि इसका मकसद इटली में सरकारों को स्थिर बनाना है। इटली का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक चलने वाली सरकारों के लिए नहीं जाना जाता। वहां कई सरकारें कुछ ही समय बाद गिर गईं।

वहीं, विरोधियों ने इसे मेलोनी से जोड़ते हुए ‘मेलोनेल्लुम’ नाम दिया है। उनका आरोप है कि मेलोनी के फायदे वाला चुनावी कानून तैयार किया है ताकि दोबारा सत्ता में आ सकें।

अगर यह कानून पास हो जाता है तो विरोधी दल और संगठन इसे इटली की संवैधानिक अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम भी पहले ही घोषित होगा

प्रस्ताव में एक नियम यह भी है कि चुनाव लड़ने वाला गठबंधन मतदान से पहले ही प्रधानमंत्री पद के अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करेगा। सरकार का कहना है कि इससे मतदाताओं को पहले से पता रहेगा कि जीतने पर प्रधानमंत्री कौन बनेगा। इससे चुनाव में स्पष्टता और पारदर्शिता आएगी।

लेकिन विरोधियों का कहना है कि इटली में प्रधानमंत्री चुनना राष्ट्रपति का अधिकार है। राष्ट्रपति का चुनाव संसद करती है और उनके पास कानून बनाने तथा न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कुछ खास अधिकार भी हैं। विरोधियों को लगता है कि पहले से उम्मीदवार तय करने का नियम राष्ट्रपति की भूमिका को कमजोर कर सकता है।

पहले भी बोनस सीटें देने की कोशिश हुई थी

इटली में 1993 के बाद से राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए छह चुनावी कानून बनाए जा चुके हैं। इनमें पहले भी जीतने वाली पार्टी को अतिरिक्त सीटें देने की कोशिश की गई थी।

साल 2005 में बने एक चुनावी कानून में भी ऐसा प्रावधान था, लेकिन 2013 में इटली की संवैधानिक अदालत ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया था। अदालत का कहना था कि अतिरिक्त सीटें देने के लिए वोट का कोई न्यूनतम प्रतिशत तय नहीं किया गया था।

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